बुधवार, 9 मार्च 2011

असमन्जस..

बुधवार, ९ मार्च २०११

असमन्जस..

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सीधा-साधा रास्ता भी मुझको,
अब लगता चौराहा-सा,
जाने किस धुन मे भाग रहा,
है हर इन्सा बौराया-सा.

पैसा-पैसा करता रह्ता,
है वो अमीर इतराया-सा,
जैसे-तैसे जीवन जीता,
है वो गरीब सकुचाया-सा.

ज्ञानी होने का ढोँग करे,
वो पढा-लिखा इठलाया-सा,
अनपढ है जो, वो भी बस यूँही,
है पडा हुआ अलसाया-सा.

किस राह से मुझको लक्ष्य मिले,
सोचे युवा भरमाया-सा,
जीवन की इस भाग-दौड मे,
है बालक घबराया-सा.

विज्ञान से सब सुख पा लूँगा,
सोचे मानव ललचाया-सा.
इतना बदला मेरा मानव??
सोचे ईश्वर पछताया-सा..!!!

SARVESH KUMAR
SCSS JNU,NEW DELHI

शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

सरस्वती वन्दना -

नव कल्पना मन में जगे ,
नव व्यंजना सुर में सजे ।
वाणी कलम को गति मिले ,
करदो कृपा माँ शारदे !

तेरी भक्ति -भाव के इच्छुक ,
श्रेष्ठ कर्म रत ,ज्ञान धर्म युत ,
माँ ! तेरा आवाहन करते ;
इच्छित वर उनको मिलते हैं ।
कृपा दृष्टि हो माँ सरस्वती ,
हों मन में नव भाव अवतरित ।

माँ वाणी! ,माँ सरस्वती !,माँ शारदे !
बुद्धि विमल करदे ,
जीवन सुधार दे ;
माँ वाणी! माँ सरस्वती! माँ शारदे!

वीणा वादिनि!, जग वीणा की ,
जब सुमधुर ध्वनि हम सुनते हें।
ह्रदय -तंत्र झंकृत हो जाता ,
मन-वीणा को स्वर मिलते हें ।

वीणा के जिन ज्ञान स्वरों से ,
माँ ब्रह्मा को हुआ स्मरण ;
वही ज्ञान स्वर हे माँ वाणी !
ह्रदय -तंत्र में झंकृत करदो ।
श्रृष्टि ज्ञान स्वर मिले श्याम को ,
करुँ वन्दना पुष्पार्पण कर ।

श्रम ,विचार व कला भाव के ,
अर्थ परक, और ज्ञान रूप की ;
सब विद्याएँ करें प्रवाहित ,
सकल भुवन में माँ कल्याणी !
ज्ञान रसातल पड़े श्याम को ,
भी कुछ वाणी-स्वर-कण दो माँ ॥

शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2008

स्वागत—गीतम्

महामहनीय मेधाविन्, त्वदीयं स्वागतं कुर्मः।
गुरो गीर्वाणभाषायाः, त्वदीयं स्वागतं कुर्मः।।
दिनं नो धन्यतममेतत्, इयं मंङ्गलमयी वेला।
वयं यद् बालका एते, त्वदीयं स्वागतम् कुर्मः॥
न काचिद् भावना भक्तिः, न काचित् साधना शक्तिः।
परं श्रद्धा-सुमाञ्जलिभिः, त्वदीयं स्वागतं कुर्मः।
किमधिकं ब्रूमहे श्रीमन् निवेदनमेतदेवैकम्।
न बाला विस्मृतिं नेयाः त्वदीयं स्वागतं कुर्मः॥

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2008

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हनुमान चालीसा

श्री राम जय राम जय जय दयालु
श्री राम जय राम जय जय कृपालु

अतुलित बल धामं हेम शैलाभ देहम्
दनुज वन कृषाणं ज्ञानिनां अग्रगणयम्
सकल गुण निधानं वानराणामधीशम्
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
वरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार ।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥
राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवन सुत नामा ॥
महावीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमिति के संगी ॥
कंचन वरन विराज सुवेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥
हाथ बज्र औ ध्वजा विराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥
शंकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥
विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

सूक्ष्म रूप धरि सियहि देखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचंन्द्र के काज सँवारे ॥
लाय सजीवन लखन जियाये । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरत सम भाई ॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना । लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥
दु्र्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ॥
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महावीर जब नाम सुनावैं ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥
सब पर राम तपस्वीं राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥
और मनोरथ जो कोइ लावै । तासु अमित जीवन फल पावै ॥
चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
साधु संत के तुम रखबारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥
अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरैं हनुमत बलबीरा ॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरू देव की नाईं ॥
जो शत बार पाठ कर कोई । छूटे बंदि महा सुख होई ॥
जो यह पढै हनुमान चलीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय दयालु
श्री राम जय राम जय जय कृपालु

अतुलित बल धामं हेम शैलाभ देहम्
दनुज वन कृषाणं ज्ञानिनां अग्रगणयम्
सकल गुण निधानं वानराणामधीशम्
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
वरनऊँ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार ।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥
राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनिपुत्र पवन सुत नामा ॥
महावीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमिति के संगी ॥
कंचन वरन विराज सुवेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥
हाथ बज्र औ ध्वजा विराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥
शंकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥
विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

सूक्ष्म रूप धरि सियहि देखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचंन्द्र के काज सँवारे ॥
लाय सजीवन लखन जियाये । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरत सम भाई ॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना । लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥
दु्र्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ॥
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महावीर जब नाम सुनावैं ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥
सब पर राम तपस्वीं राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥
और मनोरथ जो कोइ लावै । तासु अमित जीवन फल पावै ॥
चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
साधु संत के तुम रखबारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥
अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरैं हनुमत बलबीरा ॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरू देव की नाईं ॥
जो शत बार पाठ कर कोई । छूटे बंदि महा सुख होई ॥
जो यह पढै हनुमान चलीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ॥

हमारे रामजी से राम राम, कहियो जी हनु्मान,
कहियो जी हनु्मान, कहियो जी हनु्मान

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

श्री राम जय राम जय जय राम




भजब - छोड़ झमेला झूठे जग का

छोड़ झमेला झूठे जग का
कह गये दास कबीर |
पार लगायेंगे एक पल में
तुलसी के रघुवीर ||

भूल भुलैयाँ जीवन तेरा
साँचो नाम प्रभु को |
मन में बसा ले आज तू बन्दे
लेकर नाम गुरु को |
सूरदास के श्याम हरेंगे
जनम जनम की पीर ||

मेरा मेरा दिन भर करता
पर तेरा कछु नाँहीं |
माटी का ये खेल है सारा
मिलेगा माटी माँहीं |
मीराजी के गीत बुलायें
सबको यमुना तीर ||